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Patience (Sabr) in Islam – इस्लाम में सब्र का महत्व और इनाम

Paragraph 1 (English)

Paragraph 2 (Hindi)

सब्र इस्लाम की सबसे बड़ी नेमतों में से है।
यह मुसलमान को मुश्किल वक़्त में मज़बूत बनाता है।
क़ुरान में सब्र का ज़िक्र 90 से ज़्यादा बार आया है।
अल्लाह ने सब्र करने वालों के लिए बड़ा इनाम रखा है।
पैग़म्बर ﷺ ने फ़रमाया, “सब्र रोशनी है।”
यह दिल को मायूसी और निराशा से बचाता है।
सब्र असली कामयाबी की चाबी है।

woman looking on an hourglass on a wooden frame
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Paragraph 3 (English)

Paragraph 4 (Hindi)

सब्र तीन बड़ी जगहों पर ज़रूरी है।
पहला, अल्लाह के हुक्मों पर अमल करने में सब्र।
दूसरा, गुनाहों और फितनों से बचने में सब्र।
तीसरा, मुश्किलात और इम्तिहानों में सब्र।
हर तरह का सब्र अल्लाह के पास इनाम रखता है।
यह उसके हिकमत पर भरोसे की निशानी है।
मूमिन की असली ताक़त सब्र है।


Paragraph 5 (English)

Paragraph 6 (Hindi)

क़ुरान कहता है, “बेशक अल्लाह सब्र करने वालों के साथ है।”
यह ईमान वालों के लिए सबसे बड़ी इज़्ज़त है।
अल्लाह का साथ मिलने से रूह को सुकून मिलता है।
सब्र करने का मतलब है कि अल्लाह की मदद आती है।
फ़रिश्ते भी सब्र करने वालों के लिए दुआ करते हैं।
सब्र दर्द को रहमत में बदल देता है।
यह परेशानियों को रूहानी तरक़्क़ी बना देता है।


Paragraph 7 (English)

Patience is also a shield against anger.
It prevents a person from reacting with harm.
The Prophet ﷺ advised controlling anger through silence.
He said the strong one is not who fights but who controls himself.
Patience brings dignity and respect in society.
It makes a person wise and thoughtful.
Without sabr, anger destroys relationships and faith.

woman looking on a hourglass on wooden frame
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Paragraph 8 (Hindi)

सब्र ग़ुस्से के खिलाफ़ ढाल भी है।
यह इंसान को नुक़सानदेह रिएक्शन से रोकता है।
पैग़म्बर ﷺ ने ग़ुस्सा आने पर खामोश रहने की तालीम दी।
उन्होंने कहा, असली ताक़तवर वही है जो अपने ग़ुस्से पर काबू रखे।
सब्र इंसान को इज़्ज़त और शराफ़त दिलाता है।
यह इंसान को हिकमत वाला और सोच-समझ वाला बनाता है।
बिना सब्र के ग़ुस्सा रिश्तों और ईमान को तबाह कर देता है।


Paragraph 9 (English)

Paragraph 10 (Hindi)

सब्र का सबसे बड़ा इम्तिहान ग़म और नुकसान में होता है।
जब कोई अपना खो जाता है, सब्र दिल को सुकून देता है।
पैग़म्बर ﷺ ने अपनी औलाद खोई लेकिन सब्र किया।
उन्होंने सिखाया कि कहो, “इन्ना लिल्लाही वा इन्ना इलैहि राजिऊन।”
यह याद दिलाता है कि सब कुछ अल्लाह का है।
ग़म में सब्र करने से आख़िरत में बड़ा इनाम मिलता है।
यह आंसुओं को रहमत और मग़फ़िरत बना देता है

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Paragraph 11 (English)

Paragraph 12 (Hindi)

इबादत में भी सब्र की ज़रूरत है।
नमाज़ पाबंदी और सख़्ती से पढ़ना सब्र सिखाता है।
रोज़ा भूख और ख्वाहिशात पर सब्र सिखाता है।
हज सफ़र और मुश्किलात में सब्र की मिसाल है।
हर इबादत सब्र और कंट्रोल मांगती है।
सब्र से इबादत सच्ची और मक़बूल बनती है।
बिना सब्र के इबादत में रूह नहीं रहती।


Paragraph 13 (English)

The stories of prophets are filled with patience.
Prophet Ayyub عليه السلام showed sabr during severe illness.
Prophet Yaqub عليه السلام was patient after losing Yusuf عليه السلام.
Prophet Muhammad ﷺ endured hardships with patience.
These examples inspire believers to remain steadfast.
Sabr is the mark of true faith.
The prophets are role models of patience.

Paragraph 14 (Hindi)

अंबिया की ज़िंदगियाँ सब्र की मिसालों से भरी हैं।
हज़रत अय्यूब عليه السلام ने बीमारी में सब्र किया।
हज़रत याक़ूब عليه السلام ने यूसुफ़ عليه السلام के गुम होने पर सब्र किया।
हज़रत मुहम्मद ﷺ ने हर तकलीफ़ में सब्र किया।
ये मिसालें ईमान वालों को मज़बूत रहने का सबक देती हैं।
सब्र असली ईमान की निशानी है।
अंबिया सब्र के सबसे बड़े रोल मॉडल हैं।


Paragraph 15 (English)

Paragraph 16 (Hindi)

सब्र दुनिया की कामयाबी भी दिलाता है।
यह पढ़ाई, काम और रिश्तों में मदद करता है।
बिना सब्र के मक़सद पूरे नहीं होते।
सब्र ज़िंदगी में अनुशासन सिखाता है।
यह इंसान को मज़बूत और समझदार बनाता है।
अल्लाह सब्र करने वालों की मेहनत में बरकत देता है।
सब्र दुनियावी और रूहानी दोनों कामयाबियों का रास्ता है।


Paragraph 17 (English)

Paragraph 18 (Hindi)

सब्र इंसान को माफ़ करने की ताक़त देता है।
सब्र वाला इंसान बदला और ग़ुस्से से बचता है।
वह अल्लाह की खातिर माफ़ कर देता है।
पैग़म्बर ﷺ ने मक्का में अपने दुश्मनों को भी माफ़ कर दिया।
सब्र लोगों में अमन और एकता लाता है।
यह ईमान वालों को नफ़रत से ऊपर उठाता है।
माफ़ करना सब्र का फल है।


Paragraph 19 (English)

Paragraph 20 (Hindi)

अल्लाह ने सब्र करने वालों के लिए बे-हिसाब इनाम का वादा किया है।
क़ुरान कहता है, “सब्र करने वालों को बग़ैर हिसाब के सवाब मिलेगा।”
यह इस्लाम में सब्र की महानता दिखाता है।
किसी और अमल के लिए ऐसा वादा नहीं।
सब्र का इनाम खुद अल्लाह देता है।
यह अल्लाह को बहुत पसंद है।
सब्र आख़िरत की कामयाबी दिलाता है।

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