concentrated black man praying on rug at home
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Namaz (Salah) in Islam – नमाज़ का महत्व और फ़ज़ीलत”786

Paragraph 1 (English)

bird s eye view of people kneeling in worship
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Paragraph 2 (Hindi)

नमाज़ इस्लाम का दूसरा रुक्न है।
यह दिन में पाँच बार मुक़र्रर वक़्त पर अदा की जाती है।
नमाज़ इंसान को सीधे अल्लाह से जोड़ती है।
क़यामत के दिन सबसे पहले नमाज़ का हिसाब होगा।
पैग़म्बर ﷺ ने फ़रमाया, “नमाज़ जन्नत की चाबी है।”
यह मुसलमान की ज़िंदगी में अनुशासन और तरतीब लाती है।
नमाज़ ईमान की बुनियाद है।


Paragraph 3 (English)

Paragraph 4 (Hindi)

हर नमाज़ की अपनी अहमियत और खूबसूरती है।
फ़ज्र सुबह के उजाले और रहमत का पैग़ाम लाती है।
ज़ुहर दोपहर की गरमी में सुकून देती है।
असर इंसान को दोपहर की ग़फ़लत से बचाती है।
मग़रिब सूरज ढलने पर शुक्र अदा करने का वक़्त है।
इशा रात की राहत और तफ़क्कुर लाती है।
पाँचों मिलकर पूरा दिन इबादत में ढक लेते हैं।

man praying open air
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Paragraph 5 (English)

Paragraph 6 (Hindi)

नमाज़ अल्लाह से सीधा रिश्ता है, जिसमें कोई रुकावट नहीं।
यह रूह को गुनाह और घमंड से पाक करती है।
जब मुसलमान नमाज़ पढ़ता है तो वह सारे जहाँ के रब के सामने खड़ा होता है।
यह बंदे और खालिक की बातचीत है।
पैग़म्बर ﷺ नमाज़ में सुकून पाते थे।
मुश्किल वक़्त में वह नमाज़ का सहारा लेते थे।
नमाज़ मोमिन के लिए पनाह और सुकून है।


Paragraph 7 (English)

people praying in historic peshawar mosque interior
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Paragraph 8 (Hindi)

नमाज़ इंसान को बुराई और गुनाह से रोकती है।
क़ुरान कहता है, “नमाज़ बेहयाई और बुरे कामों से रोकती है।”
यह मुसलमान को सीधी राह पर चलाती है।
पाबंदी से नमाज़ पढ़ना ज़िंदगी में अनुशासन लाता है।
यह वक्त की पाबंदी और ज़िम्मेदारी सिखाती है।
नमाज़ हमें अल्लाह के सामने हिसाब की याद दिलाती है।
यह इंसान और समाज दोनों को सुधारती है।


Paragraph 9 (English)

Paragraph 10 (Hindi)

नमाज़ की फ़र्ज़ियत मेराज की रात हुई।
यह अकेली ऐसी इबादत है जो आसमान पर सीधे पैग़म्बर ﷺ को दी गई।
इससे इसकी अहमियत साफ़ होती है।
जंग के मैदान में भी नमाज़ छोड़ना जायज़ नहीं।
हर हाल में मुसलमान को नमाज़ पढ़ने का हुक्म है।
यह नमाज़ की केन्द्रीय अहमियत दिखाता है।
नमाज़ ईमान की रूह है।


Paragraph 11 (English)

Praying in congregation carries extra rewards.
The Prophet ﷺ said prayer in jama’ah is 27 times more rewarding.
It builds unity among Muslims.
Standing shoulder to shoulder removes pride and status.
It reminds believers of equality before Allah.
Congregational Salah strengthens brotherhood.
It turns mosques into centers of light.

Paragraph 12 (Hindi)

जमाअत से नमाज़ पढ़ने का बड़ा सवाब है।
पैग़म्बर ﷺ ने फ़रमाया, जमाअत की नमाज़ 27 गुना अफ़ज़ल है।
यह मुसलमानों में एकता पैदा करती है।
कंधे से कंधा मिलाना घमंड और दर्जे को मिटाता है।
यह अल्लाह के सामने बराबरी की याद दिलाता है।
जमाअत भाईचारे को मजबूत करती है।
मस्जिदें रोशनी और रहमत का मरकज़ बनती हैं।


Paragraph 13 (English)

Paragraph 14 (Hindi)

नमाज़ छोड़ने के बड़े नुक़सान हैं।
पैग़म्बर ﷺ ने चेतावनी दी कि नमाज़ छोड़ना कुफ़्र की ओर ले जाता है।
यह ईमान को कमजोर करता है और दिल को सख़्त बना देता है।
नमाज़ छोड़ना अल्लाह से रिश्ता तोड़ने जैसा है।
यह दुनिया और आख़िरत दोनों में नुक़सान देता है।
नमाज़ जहन्नम से बचाती है।
इसे छोड़ना रूहानी अंधेरा लाता है।


Paragraph 15 (English)

Salah brings peace to the heart.
It removes stress and anxiety.
When a believer prostrates, he finds comfort.
It is the best form of meditation.
The Prophet ﷺ said, “The coolness of my eyes is in Salah.”
It heals sadness and grief.
Namaz is the medicine for the soul.

Paragraph 16 (Hindi)

नमाज़ दिल को सुकून देती है।
यह टेंशन और बेचैनी को मिटाती है।
जब मोमिन सज्दे में जाता है तो उसे आराम मिलता है।
यह सबसे अफ़ज़ल रूहानी तवज्जो है।
पैग़म्बर ﷺ ने फ़रमाया, “मेरी आँखों की ठंडक नमाज़ में है।”
यह ग़म और परेशानी को दूर करती है।
नमाज़ रूह की दवा है।


Paragraph 17 (English)

Paragraph 18 (Hindi)

बच्चों को नमाज़ सिखाना इस्लाम में ज़रूरी है।
वालिदैन को हुक्म है कि सात साल की उम्र से सिखाएं।
यह ईमान की मजबूत बुनियाद रखता है।
नमाज़ बच्चों के दिलों में अनुशासन डालती है।
यह उन्हें गुमराही से बचाती है।
घर वालों के साथ नमाज़ पढ़ना रिश्तों को मजबूत करता है।
इससे घरों में रहमत और बरकत उतरती है।


Paragraph 19 (English)

Paragraph 20 (Hindi)

क़यामत के दिन नमाज़ सिफ़ारिश करेगी।
यह मोमिन को सज़ा से बचाएगी।
यह बंदे के हक़ में गवाही देगी।
पैग़म्बर ﷺ ने फ़रमाया, नमाज़ ईमान और कुफ़्र के बीच फ़र्क है।
यह मोमिन की ढाल है।
बिना नमाज़ के आमाल की क़ीमत नहीं।
नमाज़ के साथ जन्नत के दरवाज़े खुलते हैं।

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