hands holding tin of rice in traditional clothes
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“Charity (Sadaqah) in Islam – इस्लाम में सदक़ा और खैरात का महत्व” 1

Paragraph 1 (English)

Paragraph 2 (Hindi)

इस्लाम में सदक़ा रहमत और रहमदिली का आईना है।
यह सिर्फ माल देने का नाम नहीं बल्कि नेकी बाँटने का तरीका है।
क़ुरान अल्लाह की राह में खर्च करने की हिदायत देता है।
पैग़म्बर ﷺ ने फ़रमाया, “सदक़ा देने से माल कम नहीं होता।”
यह दिल को ख़ुदग़र्ज़ी और घमंड से पाक करता है।
गरीबों की मदद से समाज में मोहब्बत पैदा होती है।
सदक़ा देने वाला और लेने वाला दोनों बरकत पाते हैं।


Paragraph 3 (English)

people sitting on a carpet with sack in front of them
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Paragraph 4 (Hindi)

इस्लाम में सदक़ा कई रूपों में किया जा सकता है।
मुस्कुराना भी सदक़ा गिना जाता है।
किसी की मदद करना भी सदक़ा है।
भूखों को खाना खिलाना सबसे बड़ी नेकी है।
यतीमों की मदद आख़िरत में बड़ा सवाब देती है।
पैग़म्बर ﷺ हमेशा दरियादिली और भलाई की तालीम देते थे।
हर नेकी का काम सदक़ा बन सकता है।


Paragraph 5 (English)

Paragraph 6 (Hindi)

ज़कात इस्लाम का फ़र्ज़ी सदक़ा है।
यह इस्लाम के पाँच अरकान में से एक है।
मालदार मुसलमानों पर ग़रीबों का हक़ होता है।
यह समाज में इंसाफ़ और बराबरी लाता है।
यह लालच और जमा करने की आदत को रोकता है।
ज़कात समाज में एकता और ज़िम्मेदारी पैदा करती है।
यह माल और ज़िंदगी दोनों में बरकत लाती है।

people on dinner during ramadan
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Paragraph 7 (English)

Paragraph 8 (Hindi)

सदक़ा मुसीबतों और परेशानियों को दूर करता है।
यह अचानक आने वाली आफ़तों से बचाव का साधन है।
पैग़म्बर ﷺ ने फ़रमाया कि सदक़ा अल्लाह के ग़ज़ब को ठंडा करता है।
यह माल को बर्बादी से बचाता है।
यह ग़रीबों के दिलों को सुकून देता है।
छोटा सा सदक़ा किसी की ज़िंदगी बचा सकता है।
सदक़ा अमन और सुकून का असली जरिया है।


Paragraph 9 (English)

Charity is not measured by amount but by intention.
A little given with sincerity is greater than a fortune given with pride.
Allah looks at the purity of the heart.
Even sharing water with someone is an act of charity.
The Prophet ﷺ taught us to be humble in giving.
The reward depends on sincerity, not wealth.
True charity is hidden and selfless.

Paragraph 10 (Hindi)

सदक़ा रकम से नहीं बल्कि नीयत से तोला जाता है।
कम माल भी अगर सच्ची नीयत से दिया जाए तो अफ़ज़ल है।
अल्लाह दिल की पाकीज़गी को देखता है।
किसी को पानी पिला देना भी सदक़ा है।
पैग़म्बर ﷺ ने छुपकर और नम्रता से देने की तालीम दी।
सवाब नीयत पर है, माल पर नहीं।
असली सदक़ा वही है जो बे-रियाई हो।

a person handing an aluminum platter to another person
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Paragraph 11 (English)

Paragraph 12 (Hindi)

क़ुरान कहता है कि सदक़ा बीज बोने जैसा है।
एक बीज से कई फल और फसल निकलते हैं।
इसी तरह एक सदक़ा कई गुना सवाब लाता है।
यह समाज में भलाई की लहरें पैदा करता है।
एक इंसान का सदक़ा दूसरों को भी प्रेरित करता है।
बरकत देने वाले तक अजीब तरीक़े से लौटती है।
सदक़ा आख़िरत के लिए सबसे बड़ा निवेश है।


Paragraph 13 (English)

Charity also heals the giver’s soul.
It removes arrogance and greed from the heart.
It teaches patience and gratitude.
By giving, one learns to value blessings.
It creates a heart full of empathy.
The Prophet ﷺ was the most generous of people.
Following him, Muslims learn true generosity.

Paragraph 14 (Hindi)

सदक़ा देने वाले की रूह को भी शिफ़ा देता है।
यह दिल से घमंड और लालच मिटाता है।
यह सब्र और शुक्र अदा करना सिखाता है।
देकर इंसान नेमतों की क़द्र करना सीखता है।
यह दिल में रहमत और हमदर्दी पैदा करता है।
पैग़म्बर ﷺ सबसे ज्यादा दरियादिल थे।
मुसलमान उन्हीं से असली दरियादिली सीखते हैं।


Paragraph 15 (English)

Paragraph 16 (Hindi)

सदक़ा समाजी रिश्तों को मजबूत करता है।
जब अमीर गरीब की मदद करता है तो मोहब्बत फैलती है।
यह समाज में नफ़रत और जलन को रोकता है।
यह गरीब और अमीर के बीच पुल बनाता है।
पैग़म्बर ﷺ ने भाईचारे पर समाज बनाया।
सदक़ा इस एकता का बड़ा हिस्सा है।
यह ख़ुदग़र्ज़ी को रहमत में बदल देता है।


Paragraph 17 (English)

Even small acts of charity are valued by Allah.
Giving dates, bread, or even a smile counts.
The Prophet ﷺ said, “Save yourself from Hellfire even by giving half a date.”
This shows that no charity is too small.
Allah multiplies the smallest deeds with His mercy.
Every effort counts in His sight.
Generosity is measured by sincerity, not size.

Paragraph 18 (Hindi)

छोटा सा सदक़ा भी अल्लाह के नज़दीक क़ीमती है।
खजूर, रोटी या सिर्फ मुस्कुराना भी सदक़ा है।
पैग़म्बर ﷺ ने फ़रमाया, “आधे खजूर से भी जहन्नम से बचो।”
इससे साबित होता है कि कोई सदक़ा छोटा नहीं।
अल्लाह अपनी रहमत से हर नेक काम को बढ़ा देता है।
हर कोशिश उसके पास दर्ज होती है।
दरियादिली नीयत से तोली जाती है, बड़ी रकम से नहीं।


Paragraph 19 (English)

Paragraph 20 (Hindi)

सदक़ा हर दौर और हर जगह फ़ायदा पहुँचाता है।
यह दुनिया और आख़िरत दोनों में काम आता है।
यह माल, सेहत और खानदान में बरकत लाता है।
क़ब्र में सदक़ा जारीया बनकर चलता रहता है।
इससे मदरसे, कुएँ और अस्पताल पीढ़ियों तक चलते हैं।
सदक़ा देने वाले के बाद भी सवाब पहुँचता रहता है।
यह ऐसा तोहफ़ा है जो कभी ख़त्म नहीं होता।

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